शासन से शिक्षक संवर्गों को पदोन्नति एवं सहायक शिक्षकों को समयमान वेतनमान स्वीकृत करने माँग 

 

 

नवीन श्रीवास्तव/जगदलपुर।छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग एवं ट्राइबल विभाग में शिक्षक संवर्ग के लिए विभागीय भर्ती एवं पदोन्नति नियम समय समय पर बनाया जाता रहा है।पुराने प्रचलित नियमों में सुधार कर समय समय पर बनाये गए नियमों में कुछ संवर्ग को लाभ मिला तो कुछ संवर्ग निराश भी हुए हैं।सहायक शिक्षक संवर्ग को पदोन्नति का अवसर मिला और हमारे साथी व्याख्याता पद तक पदोन्नत हुए। उच्च वर्ग शिक्षक, व्याख्याता से प्राचार्य तक पदोन्नत हुए हैं।व्याख्याता भी प्राचार्य सहित उच्च पदों पर पदोन्नत हुए हैं।लेकिन विगत 5 वर्षों से अधिक समय से पदोन्नति लंबित है।

फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी,बस्तर संभाग अध्यक्ष भानुशंकर नागराज,महामंत्री रविन्द्र विश्वास एवं मीडिया प्रभारी विधुशेखर झा का कहना है कि इसी दरम्यान शिक्षा कर्मी का उदय हुआ। पंचायत विभाग के कर्मचारी होने के बावजूद,शिक्षा/ट्राइबल विभाग में अपने अस्तित्व के लिए जमकर संघर्ष किया। उनके 8 वर्ष सेवा पूर्ण करने के फलस्वरूप,विभाग में 1 जुलाई 2018 के स्थिति में संविलियन का आदेश हुआ। फिर 2 वर्ष सेवा पूर्ण करने पर संविलियन का आदेश जारी हुआ।

फेडरेशन के कहना है कि किस संवर्ग ने क्या पाया क्या खोया इस विषय से अलग हटकर कुछ महत्वपूर्ण विषय को समझने की आवश्यकता है।पहला,भर्ती नियम सभी संवर्ग के हित के लिये बनाया जाता है।इसका लाभ सभी संवर्ग को मिले,लेकिन किसी के अधिकार का हनन न हो,यह विचारणीय होता है। फिर कोई ये कहे कि सिर्फ उसे लाभ मिले लेकिन अन्य को न मिले, ऐसा संभव नहीं है ? यदि प्रत्येक संवर्ग सिर्फ अपने हित को लेकर कोर्ट कचहरी करता रहेगा,तो सभी आपस में ही उलझकर रह जायेंगे,जैसा कि पदोन्नति में आरक्षण प्रकरण में सभी पदोन्नति में सरकार ने रोक लगा दिया था ! महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर के अभिमत के आधार पर नियमित पदोन्नति करने,शिक्षक फेडरेशन के पत्राचार से विभाग सहमत हुआ है। आज अधिकांश शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी शिक्षक संवर्ग के सामुदायिक लाभ की भावना को छोड़कर, संगठन के आड़ में व्यक्तिगत लाभ के अवसर अनुसार माँग कर रहे हैं,जोकि समुदाय के लिए घातक है।

फेडरेशन के कहना है पदोन्नति में रोक के लिए बार बार कोर्ट जाने वाले शिक्षक दोषी हैं ।सरकार तो हमारे फूट का लाभ उठाएगी।ये हमे समझना होगा। सहायक शिक्षक पद पर भर्ती हुए शिक्षकों पर, 28 अप्रैल 2008 एवं 8 अगस्त 2018 को जारी हुए समयमान वेतनमान आदेश प्रभावशील नहीं हुआ। यही स्थिति 19 अप्रैल 1999 के क्रमोन्नत वेतनमान के आदेश में उत्पन्न हुआ था। लेकिन शिक्षक संवर्ग को विशिष्ट संवर्ग मानते हुए पृथक से आदेश 24 अप्रैल 2006 को जारी हुआ,जिसमें सहायक शिक्षकों के लिए पृथक वेतनमान स्वीकृत हुआ था। मीडिया प्रभारी विधुशेखर झा ने बताया कि फेडरेशन ने नियाय पाती अभियान का आव्हान किया,तो एक संगठन समयमान वेतनमान में विसंगति को तूल देकर अड़ंगा लगा रहा है। कभी वन स्टेप अप…..तो कभी वन स्टेप डाउन वेतन विसंगति का उल्लेख कर सहायक शिक्षकों को उनके अधिकार पाने के रास्ते में व्यवधान उत्पन्न कर रहा है। यही हाल पदोन्नति के मामलों में भी है।उनके कतिपय पदाधिकारी रोड़ा लगा रहे हैं। आज जब पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ हो गया है,तो क्या, पुराना भर्ती नियम लागू करना संभव है? अलग अलग शिक्षक संवर्ग के लिए,अलग अलग नियम बनाया जाना संभव है ? नियम तो एक ही होगा,जोकि वर्तमान में प्रचलित है। नियमों में संशोधन संभव है,बशर्ते हम अपने तथ्यात्मक पक्ष को समय पर रखें।साथ ही सभी शिक्षक संवर्ग के हितों का भी ध्यान रखें।सभी पक्षों को 100 % संतुष्ट कर पाना कठिन है,लेकिन समाधान संभव है।

फेडरेशन के कहना है कि एक विभाग एक नियम के अवधारणा पर 5 मार्च 2019 का भर्ती पदोन्नति नियम बनाया गया था,जोकि वर्तमान में प्रचलित है। जोकि ई संवर्ग,टी संवर्ग एवं एल बी संवर्ग के शिक्षक संवर्गों पर प्रभावशील है। उन्होंने बताया कि,माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने अपने निर्णय दिनाँक 14 मई 2015 तथा 30 अप्रैल 2014 के द्वारा ट्राइबल विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम 28 सितंबर 2011(अराजपत्रित) एवं 20 दिसम्बर 2011(राजपत्रित) को असंवैधानिक एवं भेदभावपूर्ण घोषित करते हुए,नए भर्ती पदोन्नति नियम बनाने का आदेश विभाग को दिया था।जिसके कारण नया भर्ती पदोन्नति नियम 2019 बनाया गया है।शिक्षकों के नेतृत्व और भलाई का दंभ भरने वाले संगठनों के माँगपत्र,शिक्षक समुदाय के भलाई के स्थान पर पदाधिकारियों के व्यक्तिगत लाभ पाने के उद्देश्य से प्रेरित है। फेडरेशन के जिला अध्यक्ष आर डी तिवारी(जगदलपुर),सचिव सी एम पाण्डेय,प्रमोद सोनेल(कांकेर),प्रेमलाल शार्दुल(कोंडागाँव),अरविंद यादव(दंतेवाड़ा),सचिव फरहाना रिज़वी,बालेन्द्र कुमार शर्मा(बीजापुर),सचिव छेदीलाल सोरी,पुष्कर वर्मा(सुकमा) एवं …रतन राम बघेल ,चन्दन राम मानिकपुरी……(नारायणपुर) ने राज्य शासन से शिक्षक संवर्गों को पदोन्नति एवं सहायक शिक्षकों को समयमान वेतनमान स्वीकृत करने के माँग को दोहराया है।

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