कोविड-19 से लड़ना छत्तीसगढ़ सरकार के प्राथमिकता में ही नही -बृजमोहन अग्रवाल

 

हड़तालरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी से सरकार तुरंत बात करे, सरकार की हठधर्मिता उचित नही।

 

डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को सरकार कोरोना से लड़ने सुविधा व साधन उपलब्ध नही कर पा रही है ।

रायपुर/भाजपा विधायक व पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 के टेस्ट कुछ दिनो से आधे हो गए है। इस कारण पाॅजेटिव केस की संख्या में कमी आई है, पर कोरोना पीड़ितों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है। पहले जहाँ 20 हजार से ऊपर लोगो के प्रतिदिन टेस्ट हो रहे थे वे सिमटकर12 हजार के आस-पास हो रहे है। पिछले 3-4 दिनों से कोरोना के रफ्तार में लगे ब्रेक को परिस्थिति जन्य बताते हुए कहा कि प्रदेश में चल रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल व लाॅकडाउन के कारण लोगो का टेस्ट नही हो पा रहा है जो गंभीर स्थिति की ओर ध्यान इंकित कर रहा है। क्योंकि बिना टेस्ट के जो पाॅजेटिव लोग है वे अपने परिवार व आस-पास के लोगो को तेजी से प्रभावित कर रहे है और यही रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में कोरोना के विस्फोटक स्थिति का प्रमुख कारणों में से एक है। सरकार के पास कोरोना से लड़ने की कोई योजना ही नही है। लॉक डाउन के एक दिन पहले जो बाजारों में मेले से भी भयानक भीड़ सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क के बगैर खुलेआम इकठ्ठा था, उसके भी दुष्प्रभाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे।

 

श्री अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के भयावह स्थिति के बीच संविदा कर्मचारियों को हड़ताल शासन व प्रशासन के लापरवाही को ही प्रदर्शित करता है। हड़ताली कर्मचारियों को बुलाकर सरकार को बात करने व बीच का कोई रास्ता निकालने के बजाय सरकार हठधर्मिता पर उतर आई है। नियमितीकरण के मामले में कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर हो रहा है। कांग्रेस ने ही अपनेघोषणा पत्र में कहा था कि हम संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण करेंगे, और इनके वोट भी बटोरे, पर अब उन्हें नियमितीकरण करने, उनसे चर्चा कर समस्या का हल निकालने के बजाय उन्हें बर्खास्त कर रही है जो शर्मनाक स्थिति है।

 

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह दुर्भाग्यजनक स्थिति है, कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना से लड़ने के लिए साधन एवं सुविधा उपलब्ध नही करा पा रही है। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में पी.पी.ई कीट, ग्लव्स, सेनेटाईजर उपलब्ध नही है। अनेक जगहो पर स्वास्थ्य कर्मियों को यह सब चीजें री-यूज करनी पड़ रही है, यह भयावह स्थिति है। हमारे स्वास्थ्य कर्मी व डाॅक्टरों के जीवन से खिलवाड़ करने का सरकार को कोई अधिकार नही है। छत्तीसगढ़ सरकार के पास कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त धन होने के बाद भी सरकार स्वास्थ्य कर्मियों को डाॅक्टरों को कोरोना वारियर्स को साधन एवं सुविधा क्यों उपलब्ध नही करा पा रही है यह समझ से परे है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का हड़ताल में जाना, अस्पताल के कर्मचारियों का प्रदर्शन करना, सरकार के अकर्मण्यता को दिखलाता है। स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री को इन कर्मचारियों को बुलाकर बात करके इनकी समस्याओं का हल निकाल कर स्वास्थ्य विभाग को लाईन में लाना चाहिए। सरकार व कर्मचारियों में संवाद की स्थिति नही होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। और कोरोना काल में स्वास्थ्य व्यवस्था ढप्प होने की ओर है।

श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में टेस्ट की संख्या कम होने, रिकवरी दर कम होने, प्रभावित मरीजो की संख्या में भारी वृद्धि व मौतो के आंकड़ो में वृद्धि के बाद भी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। 5 माह का भरपूर समय मिलने के बाद भी न तो नए हाॅस्पिटल बने न बेड व ऑक्सिजन और न ही वेंटिलेटर की मांग अनुसार व्यवस्था की गई है और उसका ही परिणाम है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना का विकराल रूप सामने आ रहा है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि पिछले 6 माह में राज्य सरकार की प्राथमिकता में कोविड-19 कभी नही रही। सरकार इसे कंट्रोल करने को छोड़ उत्सव, भवन निर्माण, टेंडर-ठेका व स्थानांतरण में ही व्यस्त रही है। जिला स्तर पर जिन अधिकारियों को इन सब कामों में लगाना था उसे तो ताश के पत्ते के समान सरकार फेट रही है और इसका परिणाम जनता को भोगना पड़ रहा है। पूरे प्रदेश में कोविड-19 से जनता के मन में भय व्याप्त है।

 

 

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