लॉक डाउन लगाना, कोरोना संक्रमण के रोक थाम हेतु कोई विकल्प नहीं-मुक्तिमोर्चा

 

 

मार्च से मई तक कड़े लॉक डाउन के बाद भी संक्रमण की गति ने रफ्तार पकड़ी, तैयारी व योजनाएं जमीनी स्तर पर धारा शाही, जवाबदेही किसकी-मुक्तिमोर्चा

 

छोटे व्यपारियो,रोजमर्रा कमाने वाले,निजी नोकरी पर निर्भर लोगो के लिए लॉक डाउन बिना गुनाह की सजा देने जैसा-मुक्तिमोर्चा

 

व्यपारिक संघटन अपने प्रतिष्ठान बन करने हेतु स्वतंत्र,सभी वर्ग के विचार ले प्रशासन , एक पत्र को माद्यम मान लॉक डाउन जैसा कोई भी फैसला लेना ,जन हित में नहीं -मुक्तिमोर्चा

निगम एक्ट व पंचयात अधिनियम के प्रावधान के तहत मोहल्ला व पंचयात समिति का गठन कर ,संक्रमण को ट्रेसिंग कर टैस्टिंग बढ़ाये ,समितियों के माद्यम से प्रशासनिक मदत मुहैया करवाये सरकार-मुक्तिमोर्चा

 

 

राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते तीव्र गति को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टर को जिला स्तर पर संक्रमण के हालातों की समीक्षा कर हर फैसले लेने हेतु स्वतंत्रता प्रदाय कर दी गई है। जिसके चलते बस्तर संभाग के विभिन जिलों में बिना सभी वर्गों से सलह लिए आंशिक लॉक डाउन का फैसला किया जा रहा है। विगत दिनों बस्तर संभाग के एक बड़े व्यपारिक संघटन ने बिना छोटे व्यपारी व अन्यो से सलह लिए, प्रशासन को पत्र लिख लॉक डाउन की मांग की है। इस पूरे कृत्य पर सभी वर्गों की बात सुन बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सयोजक नवनीत चाँद ने जारी अपने बयान में कहा कि ,कोरोना संक्रमण के रोक थाम हेतु ,लॉक डाउन ही एक मात्र विकल्प नही है। मार्च से मई तक पूण लॉक डाउन पूरे देश मे शक्ति से लागू किया गया था। बस्तर प्रशासन को तीन माह का पर्याप्त मौका बिना किसी संक्रमण का सामना किये ,पूरी तैयारी हेतु व आगामी दिनों में संक्रमण से निपटने हेतु योजनाओं को बनाने व क्रियान्वयन करने का मौका मिला। वर्तमान में संक्रमण की तीव्र गति ने प्रशासनिक सभी तैयारियों की कलई खोल दी है।जब डब्ल्यू एचओ ने ही लॉक डाउन को विकल्प के रूप में नहीं माना है। तो ऐसे में एक व्यपारिक संघटन के पत्र को माद्यम बना ,छोटे व्यपारियो ,रोजमर्रा की व्यपारी व निजी संस्थाओं के कर्मचारियों की तकलीफों को नजरअंदाज कर प्रशासन का लॉक डाउन के बारे सोचना भी जन हित के खिलाफ फैसला हो सकता है। जागरूकता के तहत हर व्यक्ति व व्यपारी अपने प्रतिष्ठान को बन्द करने हेतु स्वतन्त्र है। इस लिए सभी वर्ग के वैचारिक स्वतंत्रता को बनाये रखते हुए प्रशासन को कोई फैसला लेना चाहिए। मुक्तिमोर्चा ने आगे बयान पर कहा कि बस्तर प्रशासन व निगम प्रशासन को चाहिये की वह निगम एक्ट व पँचायत अधिनियम के प्रवधानों के तहत शहर व गांव के सभी वार्डो में मोहल्ला समिति का गठन कर प्रवधानिक शक्तियों को प्रदाय कर संक्रमण के फैलाव को ट्रेसिंग व टेस्टिंग की प्रक्रिया को तीव्र कर, गली स्तर पर कंटेम्प्ट जॉन घोषित कर । समितियों के माद्यम से प्रशासनिक मदत मुहैया करवाये, ताकि जनता ,जनप्रतिनिधियों ,सामाजिक संघटनो व जमीनी स्तर के प्रशासनिक अमलो के सयुक्त प्रयासो से जन जागरूकता जगा संक्रमण के फैलाव पर रोक लगाया जा सके। आगमी दिनों में बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा जन हितों के प्राथमिकताओं के आधार पर विशेषज्ञ सलह के अनुसार एक प्रपोजल तैयार कर बस्तर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौपेगा व समस्याओं के निराकरण की अपील प्रेषित करेगा

 

 

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