कोरोना में जनहित मुद्दों को लेकर मुक्ति मोर्चा ने उठाया सवाल

 कोरोना कॉल में DMFफंड से संक्रमितों को इलाज मूलभूत सुविधाएं चाहिए सिर्फ आयुर्वेदिक काढ़ा नहीं-मुक्तिमोर्चा

मुक्ति मोर्चा ने उठाया सवाल बस्तर के अस्पताल व कोविड सेंटर अपनी बुनियादी सुविधाओं व मेडिकल उपकरण ,लेब , दवाइयों की कमी ,कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा जिमेदारी किसकी बताये

कहा तालमेल से काम हो -कोरोना कॉल में बस्तर को संक्रमण मुक्त करने हेतु सरकार व प्रशासन जनता से जुड़ कर तालमेल बैठा कर करे काम

 DMF फंड के उपयोग का विवरण जनता के समक्ष सार्वजनिक करे बस्तर प्रशासन-

जगदलपुर ।बस्तर की राशि DMF की समीक्षा बैठक पर पूरे जिले में कोरोना से बचाव के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा बटवाने के फैसले पर सरकार व जिला प्रशासन की कोरोना संक्रमण के बचाव कीअसंवेदनशील योजनाओं पर सवाल उठा बयान जारी करते हुए बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के सयोजक नवनीत चाँद ने कहा कि DMF (जिला खनिज न्यास)की राशि बस्तर के जन- जन के विकास के अधिकार की राशि है। जिसे कोरोना संक्रमण के इस संवेदनशील समय मे बड़ते तीव्रता को रोकने व संक्रमण से ग्रषित रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध करवा जान माल की हानि से बचाने हेतु खर्च करने के आदेश, सरकार द्वारा दिये गए है। विगत मार्च माह से कोरोना संक्रमण के रोक थाम हेतु राज्य व केंद्र सरकारो द्वारा लॉक डाउन के आदेश के साथ कोरोना को महामारी घोषित कर धारा 188 के प्रावधान के तहत राज्य ,जिले व ब्लाक स्तर पर संक्रमण से लड़ने व रोकने हेतु तैयारियों का वक्त लिया गया , जो माह मई तक चला व फिर सरकारो द्वारा राज्य व जिलों को संक्रमणों की गति के हिसाब से शर्तो के तहत लॉक डाउन में छूट दी जो अब तक जारी है। इन सब गतिविधियों में बस्तर को संक्रमण को फैलने से रोकने हेतु पर्याप्त समय मिला वही DMF की अतिरिक्त राशि को संक्रमण के रोक थाम में लगाने की अतिरिक्त आदेश भी सरकार से मिला ,फिर भी जनता की लाख सुझाव को सरकार व बस्तर के जनप्रतिनिधियों व प्रशासन ने दरकिनार कर तैयारियों के पर्याप्त होने की बात जनता के समकक्ष हमेशा कही गई ,पर आज वर्तमान में जब कोरोना संक्रमण बस्तर में कहर बन कर टूट रहा है। तब सरकार व बस्तर प्रशासन की तैयारियों की कलई घुलने लगी है। सभी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों ,दवाइयों व टेस्ट किट व टेस्ट लेब के अतिरिक्त उपकरण की कमी वह कर्मचारियों के पर्याप्त न होने की बात भी अब स्वास्थ अमला स्वीकारने लगा है। जिस स्थानों को प्रशासन ने कोविड सेंटरों के रूप में बदला बेहतर व्यवस्थाओ के होने की बात कह अपनी पिट थफ़थफाई थी। उसकी असुविधाओं की आवाज रोज सोशल मीडिया ,अखबारों में गुडवत्ता विभिन भोजन ,गंदगी का माहौल व एक्पायरी दवाइयों के उपयोग जैसे उदाहरणों से भरा हुआ है। वैसे में राज्य की सरकार व बस्तर के जनप्रतिनिधियों व बस्तर के प्रशासन द्वारा लगातार DMF की राशि को खर्च करने हेतु बैठक कर योजनाएं बना ,राशि को खर्च किया जा रहा है। ऐसे में बस्तर की जनता इन जिमेदारो से जानना चाहती है। कि आखिर इन राशियों का खर्च किस किस मद में किया गया व कोरोना संकमण के रोक थाम हेतु किस योजनाओं को बना राशि का खर्च का क्रियान्वयन किया जा रहा है। यदि प्रारम्भ में संक्रमण के रोक थाम हेतु सरकार की तैयारियां पर्याप्त थी तो आज यह अव्यवस्थाओं का आलम क्यों ? ऐसी गम्भीर बस्तर की परिस्थितियों में भी सरकार व जिला प्रशासन ,स्वास्थ्य अमला के साथ ताल मेल नही बैठा पा रहा है। न ही उनकी जरूरी आवश्कताओं को पूरा कर पा रहा है। उतपन्न इन अव्यवस्थाओं की परिस्थितियों ने जनता के लिए मुश्किलें पैदा कर दी है। वह जनता को अस्पतालों में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। न उनकी कोई सुनवाई हो रही है। न परेशानीयो का हल ,जिन लोगो ने कोरोना के महामारी से अपनो को खो दिया वो अपने के अंतिम संस्कार के लिए परेशान हो रहे है। यह परिस्थिति तब है। जब हम राज्य की राजधानी में उतपन्न परिस्थितियों की भयाभक स्थिति का सामना नही कर रहे है। मुक्तिमोर्चा के सयोंजक ने जारी बयान में आगे कहा कि इन सब परिस्थितियों पर गम्भीरता से विचार कर विशेषज्ञयो से राय ले समस्या व उनके समाधान के तरीकों का फॉर्मेट बना कुछ बस्तर के हितों की मांगों का लेकर ज्ञापन सौप उतपन्न समस्याओं के निराकरण की अपेक्षा सरकार से की जाएगी।

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