शिक्षक तो सृजनकर्ता हैं शिक्षक वे हैं ..जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरुप शरीर धारण कर ले

शिक्षक तो सृजनकर्ता हैं शिक्षक वे हैं ..जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरुप शरीर धारण कर ले

 

शिक्षक दिवस पर …/नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार

 

पांच तत्वों के साथ छठा तत्व सत्व स्वरूप शिक्षा भी प्रेरक तत्व है … देने का भाव …और शिक्षक तो सृजनकर्ता हैं शिक्षक वे हैं ..जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरुप शरीर धारण कर लें ताकि पूरी धरती पर सारे जीवों के लिए कल्याणकारी सुवासित फूलों की फसलें लहलहा उठे।..मानवता, सहज विकास और राष्ट्र विरोधी धनलोलुप ऐसे भेड़ियों की कमी नहीं है जिन्होंने शिक्षा को बाजारू बनाया है …क्योंकि उन्हें डर लगता है, उन्हें भय है कि शिक्षा का अलख जगा ..तो कथित विकास, साक्षरता ,सुख के आड़ में फलफूल रहा दुकानदारी बंद हो जाएगा ..गुरुता का भाव पूर्ण स्वरूप में जागृति हो गया तो शिक्षा जैसे सहज भाव को बाजारू बनाने वाले भी जलभुन कर नष्ट हो जाएंगे…वर्तमान में एक तरफ अच्छे,सच्चे लोग भी हैं जो शिक्षा को सार्थक अर्थ देने लगातार लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था पूंजीपतियों के तेज दांत वाले जबड़े में भी है ..बड़ी बड़ी चमचमाती इमारतों वाले ऐसे स्कूलों के कथित आयोजित भव्य परन्तु दिखावे के समारोह में गले में माला पहनने की राजनीतिक भूख और शौक से भी शिक्षा व्यवस्था को बचाना जरूरी है साथ ही केवल धन,वैभव ,महत्वाकांशा के अंधेरे फैलाने वाले ..भूखे,दरिद्र,अधम.. ऎसे सफेदपोश लोगों को धरती से, देश की जमीन से डिलीट करना जरूरी है… ऐसे में किसी ने कितना सही कहा है कि –गुरु ही है ,शिक्षक ही है ..जो यह बताता है कि वह बटन कौन सा जिसे दबाने से हमारे अंदर से तामसिकता डिलीट हो सकता है ..और अंदर से फूटते उजालों से सभी तरह के अन्धेरे का विनाश हो जाए…।

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